विश्वास (स्वैच्छिक )-04-May-2024
प्रतियोगिता हेतु
दिनांक: 04/05/2024
विश्वास (स्वैच्छिक
हर दिन नई आस जगती है,
विश्वास से ही दुनिया सजती है।
जहां विश्वास वहीं जीत है,
अन्यथा संसार में कौन मन का मीत है?
विश्वास ही सूरज है,
जो चमकता आसमान में।
आसमान भी विश्वास है जो,
सूरज और चांद को अपने अंदर
जगह देता है।
ये सितारे भला हम भूल कैसे सकते हैं?
विश्वास की रौशनी से जो रौशन
इस जगत को करते हैं।
विश्वास ही तो है कि
मनुष्य मरकर तारा बनता है,
बेशक शरीर से होता दूर पर
आंखों के समीप रहता है।
विश्वास की डोर बांधती सबको
यही विश्वास हमको
एक दूसरे का मित्र बनाता है।
संसार में अनगिनत बातें होती हैं
सब विश्वास ही से भरी होती हैं
जहां विश्वास वहां जीवन है
वरना बिना विश्वास बिना अधूरापन है।
विश्वास करो अपने मन पर
करो वही जो तुम्हें खुशी दे
तुम्हारे चेहरे को मुस्कान से भर दे।।
शाहाना परवीन'शान'...✍️
Varsha_Upadhyay
04-May-2024 01:28 PM
Nice
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Babita patel
04-May-2024 10:39 AM
Very nice
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